लोहे का स्वाद

Thursday, March 26, 2015




शब्द किस तरह कविता बनते हैं
इसे देखो
शब्दों के बीच गिरे हुए आदमी को पढ़ो
क्या तुमने सुना कि ये लोहे की आवाज़ है
या मिट्टी में गिरे हुए ख़ून का रंग
लोहे का स्वाद लोहार से मत पूछो
घोड़े से पूछो
जिसके मुहं में लगाम है


- सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
Share on :

No comments:

Post a Comment

 
Copyright © 2015 Hindi Kavita Site
Distributed By My Blogger Themes | Design By Herdiansyah Hamzah